गुरुवार, 14 नवंबर 2019

कबीर के दोहों का अर्थ

गुरू गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूँ  पाय।
बलिहारी गुरू अपने गोविन्द दियो बताय।।

अर्थ :कबीरदास जी कहते हैं कि यदि गुरु और भगवान उनके सामने खड़े हों तब  पहले वे गुरु के चरणों में  सिर झुकाएँगे क्योंकि उन्होंने ही ईश्वर के बारे में ज्ञान दिया है।

व्याख्या :  कबीर कहते हैं कि  बिना गुरू के ज्ञान का मिलना असम्भव है। जब तक गुरू की कृपा प्राप्त नहीं होती तब तक मनुष्य अज्ञान रूपी अंधकार में भटकता  रहता है ,उसे अज्ञान के अन्धकार से बाहर लाने वाले,ईश्वर से उसका परिचय कराने और  मोक्ष का  मार्ग दिखाने वाले गुरू ही हैं। बिना गुरू के सत्य एवं असत्य की पहचान  नहीं होती । अतः गुरू की शरण में जाना चाहिए वही सच्ची राह दिखाएँगे।
(to be completed)....

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