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बातचीत पाठ 1/व्याख्या सहित Baatcheet Lesson Explanation Class 12 हिंदी
( १०० अंक के लिए )Bihar Board 2021
बालकृष्ण भट्ट जी का लिखा यह निबंध सबसे पहले 'हिंदी प्रदीप 'मासिक पत्र में अगस्त, 1891 को छपा था . प्रश्न1 :यदि हम में वाक्शक्ति उनमें न होती तो क्या होता? यदि मनुष्य की अन्य इंद्रियाँ अपनी-अपनी शक्तियों से अविकल रहतीं और वाक्शक्ति उनमें न होती तो सब लोग लुंज-पुंज से हो मानो एक कोने में बैठा दिये गये होते और जो कुछ सुख-दु:ख का अनुभव हम अपनी दूसरी-दूसरी इंद्रियों के द्वारा करते उसे अवाक् होने के कारण आपस में एक दूसरों से कुछ न कह सुन सकते।
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प्रश्न २ : 'राम रमौवल' क्या है ?
चार व्यक्तियों व अधिक की वार्तालाप 'राम रमौवल' कही जाती है।
वाक्य प्रयोग :हर शाम हम चारों पड़ोसी मित्र पार्क में 'राम रामौवल' किया करते हैं।
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प्रश्न ३ : बातचीत के संबंध में वेन जॉनसन और एडीसन के क्या विचार हैं?
*बेन जानसन का यह कहना कि - ''बोलने से ही मनुष्य के रूप का साक्षात्कार होता है''
*एडिसन का मत है असल बातचीत सिर्फ दो में हो सकती है जिसका तात्पर्य यह हुआ कि जब दो आदमी होते हैं तभी अपना दिल दूसरे के सामने खोलते हैं जब तीन हुए तब वह दो की बात कोसों दूर गई।
प्रश्न4 :‘आर्ट ऑफ कनवरशेसन’ क्या है?
उत्तर-‘आर्ट ऑफ कनवरसेशन’ बातचीत करने की एक कला है जो योरप के लोगों में प्रचलित है। इस बातचीत की कला की पूर्ण शोभा काव्यकला प्रवीण विद्वमंडली में है। ऐसी चतुराई के साथ इसमें प्रसंग छोड़े जाते हैं कि जिन्हें सुनकर कान को अत्यन्त सुख मिलता है। साथ ही इसका अन्य नाम 'सुह्रद गोष्ठी 'है। 'सुह्रद गोष्ठी' की बातचीत की विशेषता यह है कि बात करनेवालों की जानकारी अथवा पंडिताई का अभिमान या कपट कहीं प्रकट नहीं होता बल्कि कानों में रसाभास पैदा करने वाले शब्दों को बरतते हुए चतुर सयाने अपने बातचीत को सरस रखते हैं।लेकिन हमारे देश में स्थिति यह है कि यहाँ के विद्वान आधुनिक शुष्क बातचीत में जिसे शास्त्रार्थ कहते हैं, अपनी बातचीत में वैसा रस नहीं घोल सकते,वे नीरस होते हैं ।
प्रश्न 5.
मनुष्य की बातचीत का उत्तम तरीका क्या हो सकता है? इसके द्वारा वह कैसे अपने लिए सर्वथा नवीन संसार की रचना कर सकता है?
उत्तर-
मनुष्य में बातचीत का सबसे उत्तम तरीका उसका आत्मवार्तालाप या आत्मालाप है। आत्मवार्तालाप से तात्पर्य है कि मनुष्य अपने अन्दर ऐसी शक्ति विकसित करे जिसके कारण वह अपने आप से बात कर लिया करे।इससे वह क्रोध पर नियंत्रण कर सकता है जिसके कारण अन्य किसी व्यक्ति को कष्ट न पहुँचे। हमारी भीतरी मनोवृति प्रशिक्षण नए-नए रंग दिखाया करती है। वह हमेशा बदलती रहती है। लेखक इस मन को प्रपंचात्मक संसार का एक बड़े आईने के रूप में देखते हैं जिसमें जैसा चाहो वैसा देख पाना संभव होता है । अतः मनुष्य को चाहिए कि मन के चित्त को एकाग्र कर मनोवृत्ति स्थिर कर अपने आप से बातचीत करना सीखे। इससे इसे अपनी जीभ या वाणी पर नियंत्रण हो सकेगा जिसके कारण वह बिना प्रयास के क्रोधादि जैसे बड़े-बड़े अजेय शत्रु पर भी विजय पा सकता है । वाणी पर नियंत्रण से मनुष्य दूसरों का भला भी कर सकता है इसलिए मनुष्य के बातचीत करने का यही सबसे उत्तम तरीका है।
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अभ्यास प्रश्न
नीचे दिए गए वाक्यों में सर्वनाम छाँटें और बतायें कि वे सर्वनाम के किस भेद के अन्तर्गत आते हैं?
(क) कोई चुटीली बात आ गई हँस पड़े।
उत्तर-
कोई-अनिश्चयवाचक सर्वनाम
(ख) इसे कौन न स्वीकार करेगा।
उत्तर-
कौन-प्रश्नवाचक सर्वनाम
(ग) इसकी पूर्ण शोभा काव्यकला प्रवीण विद्वमंडली में है।
उत्तर-
इसकी-निश्चयवाचक
(घ) वह प्रपंचात्मक संसार का एक बड़ा भारी आईना है।
उत्तर-
वह-निश्चयवाचक
(ङ) हम दो आदमी प्रेमपूर्वक संलाप कर रहे हैं।
उत्तर-
हम-पुरुषवाचक सर्वनाम।
प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्द संज्ञा के किन भेदों के अन्तर्गत आते हैं धुआँ, आदमी, त्रिकोण, कान, शेक्सपीयर, देश मीटिंग, पत्र, संसार, मुर्गा, मन्दिर।
उत्तर-
धुआँ – भाववाचक
आदमी – जातिवाचक
त्रिकोण – जातिवाचक
कान – जातिवाचक
शेक्सपीयर – व्यक्तिवाचक
देश – जातिवाचक
मीटिंग – समूहवाचक।
पत्र – भाववाचक संसार
संसार – जातिवाचक
मुर्गा – जातिवाचक
मन्दिर – जातिवाचक
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