Tuesday, January 12, 2021

लेखक परिचय चन्द्रधर शर्मा गुलेरी /Chandradhar Sharma 'Guleri'

 

 

लेखक परिचय
 चन्द्रधर शर्मा गुलेरी

 


 चन्द्रधर शर्मा गुलेरी (1883–1922)

जीवन–परिचय : हिन्दी गद्य साहित्य में महत्त्वपूर्ण स्थान रखने वाले चन्द्रधर शर्मा गुलेरी का जन्म 7 जुलाई, सन् 1883 ई. के दिन जयपुर, राजस्थान में हुआ था। लेकिन इनका मूल निवास स्थान कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश का गुलेर नामक गाँव था।
पिता का नाम :पं. शिवराम था।

शिक्षा:  बचपन में  संस्कृत में शिक्षा प्राप्त की।
1899 में इलाहाबाद तथा कोलकाता विश्वविद्यालयों से क्रमश: एंट्रेंस तथा मैट्रिक पास की।
 सन् 1901 में कोलकाता विश्वविद्यालय से इंटरमीडिएट करने के उपरान्त सन् 1903 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बी. ए. किया।

कार्यक्षेत्र /वृत्ति : सन् 1904 में जयपुर दरबार की ओर से खेतड़ी के नाबालिग राजा जयसिंह के अभिभावक बनकर मेयो कॉलेज, अजमेर में आ गए।
इसके बाद इन्हें जयपुर भवन छात्रावास के अधीक्षक के रूप में नियुक्त किया गया।
 सन् 1916 में संस्कृत विभाग के अध्यक्ष बनाए गए।  अन्तिम दिनों में मदन मोहन मालवीय के निमन्त्रण पर इन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में प्राच्य विभाग के कार्यवाहक प्राचार्य तथा मनीन्द्र चन्द्र नंदी पीठ में प्रोफेसर के रूप में कार्य किया।

 निधन:  12 सितम्बर, 1922 के दिन हुआ।

रचनाएँ :
चन्द्रधर शर्मा गुलेरी की प्रमुख रचनाएँ  निम्नलिखित हैं--

 कहानियाँ–सुखमय जीवन (1911), बुद्ध का काँटा (1911), उसने कहा था (1915)।

निबन्ध–
कछुआ धरम, मारेसि मोहि कुठाँव, पुरानी हिन्दी, भारतवर्ष, डिंगल, संस्कृत की टिप्पणी, देवाना प्रिय आदि।

इसके अतिरिक्त प्राच्यविद्या, इतिहास, पुरातत्व, भाषा विज्ञान और समसामयिक विषयों पर निबन्ध लेखन।

अंग्रेजी निबन्ध–ए पोयम बाय भास, ए कमेंटरी ऑन वात्सयायंस कामसूत्र, दि लिटरेरी क्रिटिसिज्म आदि।

टिप्पणियाँ–अनुवादों की बाढ़, खोज की खाज, क्रियाहीन हिन्दी, वैदिक भाषा में प्राकृतपन आदि।

संपादन–समालोचक, काशी नागरी प्रचारिणी पत्रिका। इसके अतिरिक्त इन्होंने देशप्रेम को लेकर कुछ महत्त्वपूर्ण कविताएँ भी लिखी हैं।

साहित्यिक विशेषताएँ :
कम लिखकर बहुत अधिक ख्याति प्राप्त करने वाले चन्द्रधर शर्मा गुलेरी हिन्दी गद्य साहित्य के एक प्रमुख लेखक हैं।
वे हिन्दी, संस्कृत, अंग्रेजी आदि भाषाओं के प्रकांड विद्वान थे।गणित और ज्योतिष का भी इन्हें बहुत अच्छा ज्ञान था.
 इन्होंने अपनी अभिरुचि के विभिन्न विषयों पर निबंध, लेख, टिप्पणियाँ आदि लिखीं।
 हिन्दी कहानी के विकास में इनका प्रत्यक्ष तथा परोक्ष रूप से महत्त्वपूर्ण योगदान रहा।
 यथार्थ के संतुलित संधान के साथ आधुनिक कथ्यों वाली महत्त्वपूर्ण कहानियाँ लिखीं।
इनकी कहानियों की विषयवस्तु और कथ्य अधिक गंभीर, रोचक तथा समय से आगे की है।

'उसने कहा था ' कहानी हिंदी  की पहली प्रेम  कहानी मानी जाती है।जिसने इन्हें सबसे अधिक  लोकप्रियता दी ।

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