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एक शब्द के उत्तर :
- 'नाथ संभुधनु भंजनिहारा' में ‘नाथ’.................शब्द का प्रयोग हुआ है.
- परशुराम ने लक्ष्मण को काल के वश बताया क्योंकि..........
- परशुराम अत्यंत क्रोधी के रूप में विश्व में प्रसिद्ध थे .
- लक्ष्मण ने परशुराम के वचनों को करोड़ों वज्रों के समान कठोर बताया.
- 'होइहि केउ एक दास तुम्हारा' पंक्ति में राम ने ‘दास’ शब्द का प्रयोग अपने लिए किया है.
- शिव धनुष भंग होने पर ...परशुराम ........... कुपित हुए .
- गाधिसूनु विश्वामित्र के लिए प्रयोग किया गया है.
- परशुराम लक्ष्मण को मंदबुद्धि कह रहे हैं.
- परशुराम ने धनुष तोड़ने वाले को अपना सेवक नहीं 'शत्रु' माना.
- परशुराम ने लक्ष्मण को मारने हेतु अपना फरसा हाथ में लिया .
- “ऐहि धनु पर ममता केहि हेतू” लक्ष्मण ने परशुराम से पूछा .
- शिव का धनुष कैसे टूट गया था?
- उत्तर :धनुष बहुत पुराना और जीर्ण था ,राम ने तो धनुष को नया जानकर परखा था किन्तु वह उनके छूने मात्र से ही टूट गया.
- लक्ष्मण के अनुसार परशुराम को 'गालियाँ देना'शोभा नहीं दे रहा था.
- सभा के सभी लोगों ने लक्ष्मण का अपशब्द बोलना ' अनुचित बताया.
- परशुराम ने अपने फरसे की विशेषता बताई कि वह राजा सहस्रबाहु की हजार भुजाओं को काटने वाला अस्त्र है.
- रघुवंश कुल की परम्परा लक्ष्मण ने बताई कि इस वंश में देवताओं, ब्राह्मणों, भगवान के भक्तों और गायों पर वीरता दिखाने की परम्परा नहीं है.
- लक्ष्मण ने शूरवीर की विशेषता बताई कि शत्रु को रणभूमि में सामने देखकर वे बातें नहीं बनाते बल्कि अपना पराक्रम दिखकर परिचय देते हैं .
- परशुराम गुरु का ऋण लक्ष्मण का वध करके चुकाना चाहते थे .
- 'आपको मारने से पाप लगेगा और हार जाने पर अपयश मिलेगा' यह किसने किससे कहा?
- लक्ष्मण ने परशुराम से कहा.
Your doubts:-
Chitra Kandpal
1 day ago
Mam mujhe 5 paragraph ki 8th line nahi samajh aa Rahi pls mam kuch easy sa Bata do Monday Ko test hai😔😔😔
उतर देते छोड़ौं बिनु मारे।
केवल कौसिक सील तुम्हारे।।
न त येही काटि कुठार कठोरे।
गुरहि उरिन होतेउँ श्रम थोरे।।
जब विश्वामित्र ने परशुराम से लक्ष्मण को बालक समझकर छोड़ देने के लिए कहा तब परशुराम कह रहे हैं कि वे क्रोधी स्वभाव के हैं और उनका फरसा (axe) तीखी धार वाला है ,मुझमें दया नहीं है ...कहने का अर्थ है कि वे ऐसे स्वभाव वाले हैं और उनके पास तेज़ हथियार भी है ,ऐसे में केवल विश्वामित्र के कहने पर उनकी मान रखते हुए /उनके प्रेम के कारण ही लक्ष्मण को बिना मारे छोड़ रहे हैं ...वर्ना मैं इसको {लक्ष्मण को )इस कठोर (strong) कुठार से काट देता और गुरु के ऋण से मुक्त हो जाता...ऋण का अर्थ है उधार/क़र्ज़ ....debt /..[ उनके गुरु हैं शिव...और शिव- धनुष तोडने के अपराधी को सज़ा देकर वे गुरु ऋण से मुक्त होना चाहते हैं----[ शस्त्र शिक्षा पूरी होने के बाद भगवान परशुराम अपने गुरु शिव को गुरु दक्षिणा देना चाहते थे,शिव ने उन्हें शेषनाग का सर लाने को कहा था ,वे जा रहे थे तब रास्ते में धनुष टूटने की आवाज़ से वे यहाँ आ गये (ज्ञात हो कि लक्ष्मण जी ही शेषनाग के अवतार हैं यह बात भी बाद में परशुराम को मालूम हो गयी थी .. ..इस तरह परशुराम पर गुरु दक्षिणा का ऋण बना रहा। वह इसे नहीं चुका सके। ] ..अब आप समझे इस पंक्ति को?
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1 टिप्पणी:
Mam mujhe vo que ans chahta hu jo board me puche jate h. Please help me mam board class 10th
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